CAA कानून के बारे
मे फ़िल्मी श्री
मान और श्रीमती
जी डरपोंक की
चिंता देख कर
लग रहा है
की जो लोग कभी
वोट डालने नहीं
जाते,जो लोग
कभी आम लोगो
नहीं मिलते , जो
लोग मौसमी कुकुरमुत्तए
की तरह बहार निकल
कर हल्ला करना
शुरू कर देते
है कियोंकि उन्हें अपनी
किसी फिल्म को प्रमोट
करना होता है।और
देश के युवाओं
को गुमराह करते
है। क्या कोई इनसे
पूछेगा ७० सल्ल
से एक देश
मे दो झंडे
कश्मीर मे कियों
थे, क्यों कश्मीरी पंडितो कश्मीर से निकले
जाने पर इनकी
चिंता नहीं जगी,
क्यों किसी सैनिक
की शहादत पर
उन्हें डर
नहीं लगता -दुःख
नहीं होता, श्री
मान और श्रीमती
डरपोक जी ये
बही देश है जिसने
एक कलाकार को
आज का स्टार
बना दिया , और
आज आप को
डर लगता है
, आप को तो
राष्ट गान गाने
मे भी डर
लगता है, आप
को तो हिंदी
से भी डर
लगता है ,आप
को तो ३७०
हटने से भी
दर लगता है
,आप को तीन
तलाक के कानून
बनने से डर
लगता है ,आप
को पकिस्तान को
मुँह तोड़ जवाब
देने वाले से
भी डर लगता
है.जानते है
क्यों - क्योंकि आप तो
टुकड़े टुकड़े गैंग
की विचार धारा
से प्रभावित है
और कमल की
बात ये है
कि डर की
बात कौन कर रहा
है जो
कभी भी एक
कमरे से बहार
नहीं निकलता जबतक
की उसकी कोई
फिल्म का
प्रमोशन न हो।
और यह मेरे
विचारों की अभिव्यक्ति
की स्वतंत्रता है।
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